संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
.

उत्तराखंड में चल रहे संघर्षो की दास्तान

रुद्रपुर, 7 अक्टूबर। उत्तराखण्ड के रुद्रपुर में लम्बे संघर्ष के बाद महिन्द्रा सीआईई के बर्खास्तगी के शिकार दो श्रमिकों की कार्यबहाली हो गयी। उल्लेखनीय है कि महिन्द्रा सीआईई के जिले में दो प्लाण्ट हैं। मज़दूरों ने जबसे एकता बनानी शुरू की थी, प्रबन्धन ने दमन का रास्ता अपनाया था। पन्तनगर प्लाण्ट के…
और पढ़े...

प्रिकॉल मजदूरों का दमन : दिल्ली पहुंची प्रिकॉल मजदूरों की आवाज़, रेजिडेंट कमिश्नर…

नयी दिल्ली 7 सितम्बर 2016; दिल्ली के उत्तराखण्ड भवन पर इंकलाबी मजदूर केन्द्र, मजदूर एकता केन्द्र, श्रमिक…
6 सितम्बर 2016 को उत्तराखण्ड के रुद्रपुर में महीने भर से निकाले गये मजदूरों की कार्यबहाली, न्यूनतम वेतन बढ़ाने की माँग, श्रम कानूनों का पालन कराने व आंदोलनरत भूख हड़ताल में बैठे मजदूरों पर पुलिसिया दमन के विरोध में ट्रेड यूनियनों का महा सम्मेलन का आयोजन किया गया । राज्य महिला आयोग की…
और पढ़े...

उत्तराखण्ड : चार दिन की भूख हड़ताल के बाद प्रशासन ने लाठियों से ली सुध प्रिकोल के…

2 सितम्बर को प्रिकोल, रुद्रपुर (उत्तराखण्ड) के 6 मजदूर अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गए. तीन दिन तक…

जून 2013 की श्रीनगर आपदा के लिए जी.वी.के. कंपनी जिम्मेदार एनजीटी ने लगाया नौ…

उत्तराखण्ड में जून 2013 की त्रासदी के लिये राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने जी.वी.के. कंपनी जिसने श्रीनगर बांध…
उत्तराखण्ड के काशीपुर स्थित ऋचा फैक्ट्री के मजदूर 27 जून को अपनी 39 दिन की हड़ताल (जिसमें 4 दिन आमरण अनशन भी शामिल है) के बाद 6 बर्खास्त श्रमिकों को पुनर्बहाल करवाने और यूनियन को मान्यता दिलवाने में सफल रहे। हालांकि बर्खास्त श्रमिकों को 8 माह दूसरी साइटों पर स्थानान्तरण पर जाना होगा।…
और पढ़े...

अवैध खनन से पीड़ित जाखपंत गांव के लोगों के संघर्ष की कहानी

उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ से देवेन्द्र पंत की रिपोर्ट; हमारा गांव (जाखपंत ) पिछले 15 वर्षों से अवैध व…

तमाम दबावों के बावजूद ऋचा फैक्ट्री, काशीपुर के मजदूरों का संघर्ष जारी

उत्तराखण्ड के उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर शहर में स्थित ऋचा फैक्ट्री के मजदूर फैक्ट्री में यूनियन खत्म करने के…
जंगल बचाने की आड़ में वनवासी समुदाय को वनों से बेदखल कर दिया गया। परिणामस्वरूप वन अनाथ हो गए। वन विभाग और वनों का रिश्ता तो राजा और प्रजा जैसा हैं। यदि वन ग्राम बसे रहेंगे तो उसमें रहने वाले अपना पर्यावास, आवास व पर्यावरण तीनों का पूरा ध्यान रखते है। परंतु आधुनिक वन प्रबंधन का कमाल जंगलों की आग…
और पढ़े...