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विस्थापन विरोधी आंदोलन
‘अनिवासी’ सारंडावासी !
झारखण्ड के सारंडा जंगल के बीच तकरीबन सौ गांव ऐसे हैं जिनके बारे में औपचारिक रूप
से राज्य या केंद्र सरकार को कोई जानकारी नहीं है. जाहिर है कि तब यहां के
निवासियों की गिनती भी राज्य के बाशिंदों में नहीं होती. ये न वनग्राम
हैं, न राजस्वग्राम. इस ‘प्रोटेक्टेड फोरेस्ट’ में रहने वाले करीब 25 हजार
आदिवासी व अन्य वन निवासी बिना किसी ‘पता’ के…
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एक तरफ दीवार, दूसरी तरफ नहर और बीच में रहने को मजबूर लोग
बिहार की राजधानी पटना में टेश लाल वर्मा नगर झोपड़पट्टी है। यहां पर रहने
वाले 274 परिवार के ऊपर विस्थापन की तलवार…
अपनी जमीन पर बिता रहे विस्थापित जिन्दगी, कहानी पिढ़रवा गांव की
नये साल के पहले हफ्ते में जब भोपाल में शिवराज सिंह चौहान के मंत्री और विधायक विधानसभा में शपथ ले रहे थे, राज्य…
महानवासियों ने शुरु किया वन सत्याग्रह
महान संघर्ष समिति का एलान- एस्सार महान छोड़ो !
गुजरी 27 फरवरी 2014 को मध्यप्रेदश के सिंगरौली स्थित महान क्षेत्र के 12-14 गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने महान जंगल में प्रस्तावित खदान के लिए पर्यावरण मंत्री वीरप्पा मोईली द्वारा एस्सार कम्पनी को दिए गए दूसरे चरण के क्लियरेंस के विरोध में अमिलिया में महान जंगल बचाओ जनसम्मेलन आयोजित…
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महान जंगल बचाने के लिए सत्याग्रह का एलान
सिंगरौली, 24 फरवरी 2014। महान संघर्ष समिति ने घोषणा किया है कि वे लोग पर्यावरण व वन मंत्रालय के द्वारा दूसरे चरण…
महान कोल ब्लॉक को पर्यावरण मंजूरी : नियमों का उल्लंघन
नियमों का उल्लंघन करते हुए मोईली ने महान को पर्यावरण क्लियरेंस दिया
एस्सार-हिंडाल्को के पक्ष में नीचे गिरते…
केदारघाटी आपदा पीड़ित: अभी भी पुनर्वास के इंतजार में !
उत्तराखंड के केदारघाटी में पिछले साल आयी त्रासदी में विस्थापित हुये लोग अभी भी इस भयानक ठंड में टेंटों में रात गुजार रहे है. त्रासदी में बेघर हुए लोगों का अभी तक पुनर्वास नहीं हो पाया है जो लोग आपदा पीड़ितों की लड़ाई लड़ रहे उन पर सरकार-प्रशासन की मिलीभगत से हमले किये जा रहे हैं. 31दिसंबर 2013 को साल की अंतिम रात…
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इंदिरा सागर बांध: प्रत्याशियों से पुनर्वास पर रुख स्पष्ट करने को कहा लोगों ने
आगामी मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव के पूर्व इंदिरा सागर प्रभावितों ने नर्मदा बचाओ आन्दोलन के तहत खंडवा,…
जनता के अधिकारों को बहाल करो, चंद्रवंशी पर लगाए फर्जी मुकदमे वापस लो
आज पूरे भारत में सामाजिक कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे दायर कर उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा…
हम मरब, कउ नहीं बचाई बाबू: जीतलाल वैगा
यह केवल जीतलाल वैगा की कहानी नहीं हैं, बल्कि सिंगरौली से करीब 30 किलोमीटर दूर रिलायंस के पावर प्लांट के बनने के बाद अमजौरी में विस्थापन के बाद बनी बस्ती में सबकी यहीं कहानी है. ये उन लाखों-करोड़ो आदिवासी में शामिल हैं, जिन्हें भारत सरकार विकास के मुख्यधारा में लाने के बहाने विस्थापित कर रही है। विस्थापन सिर्फ जमीन-जंगल से ही नहीं…
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