सुरेंद्र मोहन की 5 वीं पुण्यतिथि पर संगोष्ठी : लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियां और चुनाव सुधार
समाजवादी चिंतक एवं पूर्व सांसद सुरेंद्र मोहन की पांचवीं पुण्यतिथि पर सुरेंद्र मोहन मेमोरियल फाउंडेशन, जनता ट्रस्ट और समाजवादी समागम द्वारा 17 दिसंबर 2015 को नई दिल्ली स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान में लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियां और चुनाव सुधार विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिसकी अध्यक्षता जस्टिस राजेंद्र सच्चर…
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अवैध खनन की लूट के विरोध में अभियान शुरू
एम.एम.पी (mines, minerals & People) ने खनन के बदले स्वरूप, खनन कानून, समुदाए कल्याण के लिए प्रस्तावित योजना,…
समाजवादी चिंतक पूर्व सांसद सुरेन्द्र मोहन की पुण्यतिथि पर लोकतंत्र के समक्ष…
समाजवादी चिंतक पूर्व सांसद सुरेन्द्र मोहन की 5वीं पुण्यतिथि पर सुरेन्द्र मोहन मेमोरियल फाउंडेशन, जनता ट्रस्ट और…
कागज तुम्हारा जमीन हमारी : डॉ. ब्रह्मदेव शर्मा
वंचितों के हित में लगातार संघर्षरत डॉ. बी.डी. शर्मा का विगत 6 दिसंबर को देहावसान हो गया। जनसंघर्षों, जनांदोलनों एवं लोकहित मे कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत क्षति है। उन्होंने आदिवासियों, किसानों एवं कामगारों की दशा सुधारने के लिए असाधारण कार्य किया। उनका सरल, सहज व मितव्ययी जीवन हम सबके लिए एक पाठशाला है। प्रस्तुत आलेख मई-1997…
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भूमि की कॉर्पोरेट लूट के विरोध में संघर्ष तेज करने का ऐलान : किसान संघर्ष समिति
खेती बचाओ- संविधान-बचाओ-यात्रा का सिंगना में भव्य स्वागत
किसान संघर्ष समिति द्वारा 8 दिसम्बर को…
खेती बचाओ- संविधान-बचाओ-यात्रा का सिंगना में भव्य स्वागत
किसान संघर्ष समिति द्वारा 8 दिसम्बर को मुलताई से शुरू की गई खेती बचाओ संविधान बचाओ यात्रा 13 दिसम्बर 2015 को…
कोलंबस के बाद जमीन की सबसे बड़ी लूट
पिछले कुछ सालों में किसानों के खेती छोड़ने की दर भी बढ़ी है. शहरी मजदूर के रूप में उनका पलायन बढ़ा है. जब किसान खेती छोड़ रहा है तो आखिर भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ संघर्ष कौन कर रहा है और क्यों? देश भर के किसान आंदोलनों, खेती और किसानी की दुश्वारियों, जमीनों पर पसरते रियल इस्टेट के जाल पर अलग-अलग हिस्सों में घूमकर किए गए अध्ययन पर अभिषेक…
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डॉक्टर ब्रह्मदेव शर्मा नहीं रहे
पेशे से भारतीय प्रशासनिक सेवा(आईएएस) के अधिकारी, शिक्षा से गणित में पीएचडी लेकिन ज़िंदगी भर आदिवासियों की लड़ाई…
भारत-जापान परमाणु समझौते के विरोध में खड़े हो रहे आदिवासी, किसान मछुआरे
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे 11 से 13 दिसम्बर 2015 को तीन दिनों की यात्रा पर भारत आएँगे। इस दौरान उनके बनारस…
अकाल से वीरान होता बुुंदेलखंड
भारत के सबसे मध्य में स्थित बुंदेलखंड एक बार पुनः मौसम की मार से तबाह हो रहा है। पिछले 15 वर्षों में से तकरीबन 11 वर्ष सूखे, असामयिक वर्षा, ओलावृष्टि या पाला गिरने से ग्रसित रहे हैं। बुंदेलखंड पलायन के अंतहीन भंवर में फंस गया है। शासन व प्रशासन की उदासीनता स्थानीय नागरिकों के जीवन को और अधिक संकट में डाल रही है। पेश है सप्रेस से साभार भारत डोगरा…
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