मध्यप्रदेश: सिंगरौली में आदिवासियों को नजरबंद कर अडानी द्वारा 3 लाख पेड़ काटे जाने खिलाफ किसान संघर्ष समिति ने सौंपा ज्ञापन
किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व विधायक सुनीलम ने कहा कि सिंगरौली जिले के धिरौली क्षेत्र के अमरई, बासी के जंगल की 1400 हेक्टेयर वन भूमि को कोयला खनन के लिए अडानी को सौंपने से सिंगरौली का पर्यावरण पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। पहले ही सिंगरौली देश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर है। सुनीलम ने कहा कि तीन लाख बीस हजार पेड़ काटने से आठ गांव के हजारों…
और पढ़े...
हिमाचल प्रदेश: बढ़ती आपदाओं के बीच जन संगठनों की दो टूक-सरकार संतुलित और…
मंडी, हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश और पूरा हिमालय आज बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों और लगातार बढ़ती आपदाओं के दौर से…
हिमाचल: मंडी की जनसुनवाई में आपदा पीड़ितों ने अपनी पीड़ा और नाराज़गी का किया इज़हार
15 नवम्बर 2025 को मंडी के साक्षरता भवन में राज्य के अलग-अलग जिलों मंडी, कांगड़ा, कुल्लू, किन्नौर और लाहौल से आए 70…
प्राकृतिक संसाधनों की लूट को रोकना-धरती आबा बिरसा मुंडा को सच्ची श्रद्धांजलि
धरती आबा बिरसा मुंडा के समय अंग्रेजों ने आदिवासी कृषि व्यवस्था को सामंती राज्य में बदलने की प्रक्रिया को तेज़ कर दिया था। चूंकि आदिवासी अपनी आदिम तकनीक से अधिशेष पैदा नहीं कर सकते थे, इसलिए छोटानागपुर के प्रमुखों ने गैर-आदिवासी किसानों को भूमि पर बसने और खेती करने के लिए आमंत्रित किया। इससे आदिवासियों के पास मौजूद ज़मीनें उनसे अलग हो गईं। ठेकेदारों…
और पढ़े...
कर्नाटक: देवनहल्ली के किसानों की ऐतिहासिक जीत, SKM ने दी बधाई
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने देवनहल्ली के किसानों को उनकी उस ऐतिहासिक जीत पर बधाई दिया है, जिसमें उन्होंने…
छत्तीसगढ़: वन विभाग के अवैध आदेश के खिलाफ प्रदेशभर में ज़ोरदार विरोध-प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ में वनाधिकार कानून (FRA 2006) और ग्राम सभा के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने के प्रयासों के खिलाफ कल और…
जलवायु परिवर्तन वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक तंत्र का परिणाम है: सौम्य दत्ता
"जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरणीय संकट नहीं है, यह वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक तंत्र का परिणाम भी है। यह संकट औद्योगिक विकास मॉडल, उपभोगवाद और प्राकृतिक संसाधनों के असीम दोहन से भी जुड़ा है। वर्ष 1971 में ही मानव सभ्यता ने पृथ्वी की कुल जैविक उत्पादन क्षमता के दोहन को पार कर लिया था। आज हम धरती की क्षमता से 1.8 गुना अधिक प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर…
और पढ़े...
उड़ीसा: विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर मेधा पाटकर को जन-रैली में भाग लेने से पुलिस…
‘‘मैं कोई आतंकवादी नहीं हूं जिसकी उपस्थिति से लोगों के लिए समस्या उत्पन्न होगी। मैं देश की नागरिक हूं। हम विकास के…
तमिलनाडु : बंद दरवाजों के पीछे बमुश्किल सांस लेता सेपक्कम गांव
मेरा नाम नागम्मल है और मैं 34 साल की हूं। मेरा अब तक का पूरा जीवन सेपक्कम गांव में बीता है, जो उत्तरी तमिलनाडु में…
हिमाचल प्रदेश: लाहौल स्पीति में जलविद्युत परियोजना के खिलाफ जनता का विरोध प्रदर्शन
बीते 23 मई को लाहौल स्पीति एकता मंच के बैनर तले लाहौल स्पीति के उदयपुर में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर चेनाब घाटी में प्रस्तावित जल विद्युत परियोजनाओं के विरोध में रैली निकाली और मंच ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा है कि चेनाब नदी में प्रस्तावित सेली और मियार जल विद्युत…
और पढ़े...