संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad

कोयला खदान के लिए भूमि अधिग्रहण: नियम, प्रक्रिया और भूमि स्वामियों के अधिकार

भारत में कोयला खनन जैसे औद्योगिक या सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए भूमि अधिग्रहण एक जटिल और संवेदनशील मुद्दा रहा है। भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (RFCTLARR Act, 2013) ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान पेश किए हैं। यह खबर कोयला खदान के लिए भूमि…
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भारत के सीवरों और सेप्टिक टैंकों में खत्म न होने वाली त्रासदी मैनुअल स्कैवेंजिंग

भारत  जब सरकार यह दावा करती है कि भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग का उन्मूलन हो चुका है, उस समय देशभर में सीवर और…

जनसुनवाई: सिलिकोसिस पीड़ित श्रमिकों को देरी, उदासीनता और दलाली के मामलों ने झकझोरा

मंगलवार, 20 मई को बिजोलिया की ज़मीन पर इंसाफ की एक आवाज़ गूंजी – एक ऐसी जनसुनवाई हुई जिसमें सिलिकोसिस से पीड़ित श्रमिकों और उनके परिवारों ने वर्षों की पीड़ा, उपेक्षा और अन्याय को शब्दों में ढाला. इस आयोजन को सूचना एवं रोजगार का अधिकार अभियान के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। इसमें स्वास्थ्य विभाग से जिला क्षय रोग अधिकारी (DTO), एसडीएम…
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UP: श्रमकोड और मनरेगा भुगतान में देरी के विरोध में संगतिन किसान मजदूर संगठन का…

मनरेगा में देरी से मजदूरी भुगतान के लिए कानून के अनुसार तय मुआवजा न मिलने और चार श्रम कोड के विरोध में 20 मई को …

लाहौल: प्रस्तावित मेगा जलविद्युत परियोजनाओं के विरुद्ध 23 मई को विशाल विरोध रैली…

रविवार, 18 मई को लाहौल के उदयपुर मंडल के पंचायत प्रतिनिधियों के नेतृत्व में लाहौल स्पीति एकता मंच के  अध्यक्ष…

वन भूमि अतिक्रमण: सरकारी दावों में विरोधाभास,आदिवासियों के अधिकारों पर संकट

मध्यप्रदेश में वन भूमि अतिक्रमण को लेकर सरकारी आंकड़ों और दावों में गंभीर विरोधाभास सामने आया है। एनजीटी में प्रस्तुत हलफनामे में जहां 5.46 लाख हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण की बात मानी गई है, वहीं वन विभाग की रिपोर्टें पुराने आंकड़ों पर ही अटकी हैं। इस विरोधाभास ने वन अधिकार कानून के तहत आदिवासियों को मिलने वाले अधिकारों को लेकर कई सवाल…
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गुजरात: सरकारी अस्‍पताल के निजीकरण के प्रयासों के खिलाफ आदिवासी समुदाय का विरोध

दक्षिण गुजरात के तापी जिले में स्थित व्‍यारा के सरकारी अस्‍पताल और नव-स्वीकृत मेडिकल कॉलेज के निजीकरण के…

वन विभाग की आधारहीन चिंताए!

उपनिवेशवादी प्रबंधन ने ही लोगों को वनों से दूर किया था। उनको फिर से वनों के साथ जोड़ने का यह कानून मौका देता है, जिसका लाभ होगा। डरने की जरूरत नहीं, बल्कि मिलकर बेहतर वन प्रबंधन विकसित करने पर ध्यान देने की जरूरत है। वन विभाग यदि अपनी विशेषज्ञता का उपयोग आने वाले समय में आजीविका वानिकी की ओर करें तो बेहतर होगा। ऐसे वन जो बिना काटे रोजी-रोटी दे…
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