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अवैध खनन विरोधी आंदोलन
छत्तीसगढ़ के गारेगांव में कोयला सत्याग्रह : एक इंच भी जमीन कोल माइनिंग के लिए नहीं देंगे
छत्तीसगढ़ के तमनार ब्लॉक के गारे गांव में पिछले पांच साल से लगातार हर साल गांधी जयंती के दिन कोयला सत्याग्रह आयोजित किया जाता है जिसमें आस-पास के सभी गांवों के निवासी एकत्रित होकर कोयला कानून को तोड़कर अपने क्षेत्र की एक इंच जमीन किसी निजी या शासकीय उपक्रम को कोल माइनिंग के लिए न देने का संकल्प दुहराते हैं। हर साल की तरह इस बार भी 2 अक्टूबर को…
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जबरन अवैध खनन के लिए गडचिरोली, महाराष्ट्र के आदिवासियों पर बर्बर हिंसा
इस पूंजीवादी-साम्राज्यवादी-फ़ासीवादी लुट का विरोध करे..
‘मेक इन इंडिया’, ‘मेक इन गडचिरोली’ के झूठे वादों का…
राजस्थान : बेखौफ अवैध खनन, माफियाओं के खिलाफ खान सुरक्षा महानिदेशालय पर प्रदर्शन
अजमेर, 30 अगस्त। खान सुरक्षा नियमों की परवाह किये बिना बेखौफ अवैध खनन व विस्फोटों से कोटपुतली तहसील के गॉव…
छत्तीसगढ़ : आदानी की खदान का वनभूमि डायवर्सन निरस्त होने के बावजूद 11 सितम्बर को जनसुनवाई की नौटंकी
देश आज उस मुहाने पर खड़ा है जहां या तो जंगल बचाने वाले आदिवासी बचेंगे, या जंगलराज लाने वाले कारपोरेट. देश का क़ानून और संविधान कारपोरेट हितों का अभयारण्य बन गया है. वनभूमि-हस्तांतरण को रोकने के लिए 2006 में क़ानून तो बना, लेकिन जब इसे लागू करने के लिए ज़रूरी राजनीतिक इच्छाशक्ति कंपनियों के आगे घुटने टेक देती हो तो झारखंड हो या ओडीसा या…
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‘मेक इन इंडिया’ का धौखा : राष्ट्रीय सेमिनार, 29 अगस्त 2016, नागपुर,…
'मेक इन इंडिया' में औद्योगिक गलियारे , 'स्मार्ट सिटी' परियोजना, डिजिटल भारत और स्टार्ट अप इंडिया का सपना…
रायगढ में खदानों के खिलाफ ग्रामीणों का चक्का जाम
डॉ लाखन सिंह ने जानकारी दी है कि छत्तीसगढ़ के रायगढ जिले के तमनार के मुख्य मार्ग पर 11 जुलाई 2016…
मोदी का कार्पोरेट्स को एक और तोहफा : राष्ट्रीय खनिज उत्खनन निति को मंजूरी, आदिवासियों को नई मुसीबत
संकेत ठाकुर
मोदी सरकार ने 29 जून को सातवे वेतन आयोग की अनुशंसा को अपनाने के साथ साथ बड़ी चतुराई से राष्ट्रीय खनिज एक्सप्लोरेशन पालिसी को हरी झण्डी दे दी । इसके तहत निजी संस्थाओ को खनिज सम्पदा का खजाना ढूंढने के लिए सरकार ने अनेक रियायत देने का प्रावधान है जिसमे खनिज से मिलने वाले राजस्व में सम्बंधित कम्पनी को भी एक हिस्सा दिया जायेगा ।…
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अवैध खनन से पीड़ित जाखपंत गांव के लोगों के संघर्ष की कहानी
उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ से देवेन्द्र पंत की रिपोर्ट;
हमारा गांव (जाखपंत ) पिछले 15 वर्षों से अवैध व…
विकास के नाम पर विस्थापन कब तक : अवैध खनन और विस्थापन के प्रभावों पर जनसुनवाई
जयपुर, 16 जून, नवलगढ़ में प्रस्तावित सीमेंट फैक्ट्रियों, अलवर में DRDO की परियोजना, किशनगढ़ के गाँवों में…
गिरता पानी खंडधार, बिक गया तो रक्तधार
ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले का सुदूर इलाका खंडधार आदिम जनजाति पौड़ीभुइयां के लिए जाना जाता है. पौड़ीभुइयां की संख्या खंडधार में अब भी कम से कम 30,000 है. अपने वजूद को बचाने के लिए ये लोग आखिरी जंग लड़ रहे हैं. यह लड़ाई इलाके को और यहां के लोगों को विदेशी कंपनियों के खनन से बचाने के लिए है. सरकार खंडधार की बची-खुची जमीन और जलप्रपात को खनन के…
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