संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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किसान आंदोलन

किसान संकट : आसमानी विपदा और सरकारी बेरुखी

भारतीय किसान आसमानी विपदा और सरकारी बेरुखी का एक साथ शिकार बन गया है। मध्यभारत में लगातार तीसरा कृषि मौसम किसानों के लिए कहर बनकर बरपा है। वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार भूमि अधिकार कानून (संशोधन) विधेयक को पारित कराने और म.प्र. की सरकार कृषि साीलिंग कानून को छिन्न भिन्न करने में जुट गई है। चक्की के पाट में पिस रहे किसान को अब फाँसी का फंदा …
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किसानों के हित मे संघर्ष जारी रहेगा : मुलताई किसान घोषणा-पत्र 2015

प्रस्ताव किसान संघर्ष समिति द्वारा आयोजित 17वां शहीद किसान स्मृति सम्मेलन 12 जनवरी 1998 को शहीद हुए 24 किसान…

मुलताई किसान आंदोलन ने बदला मेरे जीवन का रुख : डॉ सुनीलम

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की मुलताई तहसील के सामने 12 जनवरी 1998 को लगातार फसले खराब होने के कारण मुआवजा मॉंग रहे किसानों पर आंदोलन को कुचलने के उद्देश्य से पुलिस गोलीचालन प्रायोजित किया गया, जिसमे 24 किसान शहीद हुए, 150 किसानों को गोली लगी। सरकार ने 250 किसानों पर 66 फर्जी मुकदमे दर्ज किए। हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, आगजनी, सरकारी काम मे बाधा…
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बिजली का बिल न भरने पर पंचायत चुनाव लड़ने से रोका जाना असंवैधानिक – डॉ. सुनीलम

7 बिरुल, 10 जौलखेडा, 11 परमंडल में होगी “एक शाम शहीदों के नाम” सांस्कृतिक कार्यक्रम मध्य प्रदेश के मुलताई में…

भू-अधिग्रहण अध्यादेश को रद्द कराने के लिए देश भर में होगा किसान आंदोलन : डॉ सुनीलम

भूमि अधिग्रहण का अध्यादेश भाजपा का किसानों के प्रति रुख को साफ़ करता है ! अध्यादेश की प्रति मिलते ही यह बिलकुल…

17वां शहीद किसान स्मृति सम्मेलन मुलताई : 12 जनवरी 2015

आर्थिक सहयोग के लिए अपील प्रिय साथी, जिंदाबाद! किसान संघर्ष समिति द्वारा हर वर्ष की तरह 12 जनवरी 2015 को 17वां शहीद किसान स्मृति सम्मेलन एवं 225वीं किसान महापंचायत का आयोजन मुलताई, जिला बैतूल, म.प्र. में किया जा रहा है। महापंचायत में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मुलताई घोषणा पत्र 2015 जारी किया जायेगा तथा शहीद किसानो की स्मृति में 24 प्रथम…
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मुलताई एस.डी.एम. की तानाशाहीपूर्ण कार्यवाही : किसानों की अवैध गिरफ्तारी के विरोध…

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की मुलताई में किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने…

किसान विरोधी सिफारिशों के खिलाफ संसद मार्च और धरना

आज 31 जनवरी 2014 को दिल्ली के जंतर मंतर पर किसानों का संसद मार्च और धरना आयोजित किया गया. वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के उच्च स्तरीय कार्यकारी समूह (डब्ल्यू.जी.ई.ई.पी.) ने देश के पश्चिमी घाट के 6 राज्यों के 4156 गांवों को पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील मानकर यहाँ पर ज़मीन पर विशेष प्रतिबन्धित लगाने की सिफारिश की है. यहाँ पर लोग जमीन पर…
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