संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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छत्तीसगढ़

मोदी सरकार ने कार्पोरेट मुनाफे के लिए बनाई कामर्सियल कोल माइनिंग निति : छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन

9 अप्रेल 2018 को छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन के द्वारा “निजी व्यापार के लिए कोयला उत्खनन व उर्जा निति, दुष्प्रभाव व भविष्य की चुनौती’’ विषय पर एक दिवसीय परिचर्चा का आयोजन वृन्दावन हॉल, रायपुर में आयोजित की गई l परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोयला देश की बहुमूल्य संपदा है, जिसका उपयोग केवल जनहित व  देश की ज़रूरतों…
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मांगों के बदले दमन बन चुकी है भाजपा सरकार की नई जन नीतिः बेगा जनजाति के शांतिपूर्ण…

उधर नरेंद्र मोदी ने बनारस में बयान दिया कि अब आंदोलनों तथा प्रदर्शन से मांगे मनवाने का समय खत्म हो चुका है और…

छत्तीसगढ़ : अधूरे डैम की जानकारी मांगी तो वन विभाग ने फ़ाइलें ही जला दी

-रमेश अग्रवाल छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में बढ़ते हाथियों के प्रकोप से बचाने और उनके लिये पानी की व्यवस्था…

छत्तीसगढ़ के आदिवासियों ने सम्मेलन कर सरकार को चेताया : बहुत हुआ विनम्र निवेदन अब…

रायपुर 19 फ़रवरी 2018 - जल, जंगल, जमीन की लड़ाई, संवैधानिक अधिकारों के हनन, अनुसूचित क्षेत्रो में बढ़ते संवैधानिक…

अपनी जड़ों से उखड़ते आदिवासी : छत्तीसगढ़ से सुधा भारद्वाज की एक ज़मीनी रिपोर्ट; भाग…

छत्तीसगढ़ में घट रही घटनाओं को सरसरी तौर पर देखने पर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहाँ सबकुछ ठीक नहीं चल रहा…

बस्तर : कलगांव के 17 किसानों की जमीन बीएसपी टाऊनशिप के लिये छीन ली गई, ग्राम सभा प्रस्ताव पास करती रह गई विरोध में

अनुभव शोरी विकास के नाम पर आदिवासियों के अधिकारों का हनन आखिर कब तक,क्या विकास की परिभाषा यह है कि अपने रास्ते में आने वाले समस्त चीजें चाहे वो संवैधानिक ही क्यों न हो उसको भी कुचलते हुए आगे बढ़ते रहना है ,क्या विकास के सामने सब कुछ बौना है ,चाहे वो मनुष्य ही क्यू न हो। इस प्रकार का विकास का तात्पर्य किससे है जो की संविधान एवं लोगो को…
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सुपेबेड़ा गाँव के आदिवासी गंदा पानी पीने को मजबूर 58 की मौत : छत्तीसगढ़ सरकार,…

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा गाँव से एक किमी की दूरी पर हीरा खदान है। सरकार ने 2005 से पूरे इलाके को…

अडानी की माइन्स या हाथी, कौन जिम्मेदार है किसानों की तबाही के लिए?

हाथी के हमलों से ग्रामीणों को बचाने में नाकाम वन विभाग व राज्य सरकार के असंवेदनशील रवैये के खिलाफ विशाल…

बस्तर बुमकाल विद्रोह : आज भी जिंदा है गुण्डाधुर का संघर्ष आदिवासी परंपरा में

छत्तीसगढ़, बस्तर 10 फ़रवरी 2018। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम 1910 की महान बस्तर बुमकाल विद्रोह के अमर नायक क्रांतिकारी गुण्डाधुर का 108 वां बुमकाल दिवस कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा अन्तर्गरत देव स्थल उसेह मुदिया में मनाया गया। कोयलीबेड़ा, कागबरस से लौट कर तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट; 8 फरवरी 2018 से शुरू होकर तीन दिन 10 फरवरी तक बुमकाल दिवस मनाया…
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