संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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दिल्ली

कॉर्पोरेट खेती की ओर बढ़ता भारत : न रहेगा किसान न किसानी का संकट

शायद भारत अब किसानोंका देश नहीं कहलायेगा। यहां खेती तो की जायेगी लेकिन किसानों के द्वारा नही, खेती करने वाले कार्पोरेट्स होंगे, कार्पोरेट किसान। पारिवारिक खेती की जगह कार्पोरेट खेती। आज के अन्नदाता किसानों की हैसियत उन बंधुआ मजदूरों या गुलामों की होगी, जो अपनी भूख मिटाने के लिये कार्पोरेट्स के आदेश पर काम करेंगे। उनके लिये किसानों की समस्याओं का…
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30 नवंबर 2018 को देश भर के किसानों का दिल्ली कूच : अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय…

14 जुलाई 2018, नयी दिल्ली। 193 किसान संगठनो द्वारा बनाये गये, अखिल भारतीय किसान संघर्ष कॉर्डिनेशन कमेटी (AIKSCC) ने…

राष्ट्रीय सम्मेलन : भूमि-वन-पर्यावरण कानूनों में प्रतिकूल और जन विरोधी संशोधनों की पोल खोल; 9 जुलाई 2018, दिल्ली

साथियों, वर्षों के लम्बे संघर्ष के बाद 2013 में भूमि अधिग्रहण क़ानून, 1894 रद्द हुआ और उचित मुआवजे का अधिकार, भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता, विस्थापन और पुनर्वास अधिनियम, 2013 (जिसे 2013 का भूमि कानून के रूप में भी जाना जाताहै) पारित हुआ। क़ानून पूरी तरह जनपक्षिय नहीं था लेकिन फिर भी परियोजना प्रभावितों के हित की बात, और कई हद तक किसानों तथा…
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पेसा : आदिवासी क्षेत्रों में परंपरागत स्वशासन को क़ानूनी मान्यता देने वाला कानून

-घनश्याम पेसा कानून संविधान संधोशन से बना एक ऐसा कानून है जिसे लोकसभा और राज्य सभा ने भारी बहुमत से पारित किया था 1996 में। 24 दिसंबर 1996 को पारित यह कानून महज कानून नहीं है बल्कि आदिवासी इलाके खासकर पांचवीं अनुसूची के आदिवासी इलाके के लिए परंपरागत ढंग से जीने का एक संविधान है। पेसा कानून का अर्थ है- ''पंचायत राज एक्सटेंशन टू…
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जमीन अधिग्रहण के लिए सरकारी दबाव से डरें नहीं : जवाब में उठाए जा सकते हैं यह कदम

जब आप अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं और प्रशासनिक अधिकारी या पुलिस अधिकारी आपके ऊपर जमीन अधिग्रहण के लिए दबाव बनाएं या धमकी दें कि आपके नाम पर मुकदमा दर्ज किया जा सकता है तब आप क्या करें? पढ़ें एसी प्रवीन कुमार भगत की रिपोर्ट; सबसे पहले तो आप बिल्कुल भी न डरें। निडर होकर उनके FIR लिखने से पहले आप प्रशासनिक अधिकारी या…
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