संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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विस्थापन विरोधी आंदोलन

छत्तीसगढ़ : भिलाई स्टील प्लांट के निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन

सेल के अध्यक्ष के नाम दिये पत्र में कहा कारखाना नहीं चलाना है तब छत्तीसगढ़ियों की जमीन वापस करे भूअर्जन अधिनियम के प्रावधान के अनुसार सरकार को भूमि अंतरित करने का अधिकार नहीं है केंद्र सरकार विनिवेशीकरण और निजीकरण की नीति के अंतर्गत घाटे का बहाना लेकर सार्वजनिक क्षेत्र के भिलाई स्टील प्लांट को बेचने के फिराक में है छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच ने इसका…
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छत्तीसगढ़ : स्पात प्लांटों के विस्तार के लिए नियम विरुद्ध कराई जा रही हैं…

-राजेश त्रिपाठी रायगढ़ के तराईमाल में 3 मार्च 2021 को एन.आर.टी.एम.टी. इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की जनसुनवाई …

‘विकास’ की वजह से विनाश की ओर जाता आदिवासी समुदाय : कान में तेल डालकर…

अब केवल विकास करते रहना ही जरूरी नहीं है, बल्कि अब विकास और विकास नीतियों की समीक्षा जरूरी है। 1986 मे संयुक्त…

सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व : बाघों के संरक्षण के लिए आदिवासियों की बलि

सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व से विस्थापित किए गए आदिवासियों के बीच बढ़ते असंतोष से अब बाघ संरक्षण और आदिवासियों के निवास के अधिकार के बीच संघर्ष पैदा हो रहा है। इस साल जनवरी 2020 में सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व के अंदर खेजुरी गाँव के 60 परिवारों के 110 लोगों को जबरन स्थानांतरित किया गया। जो लोग अभी भी टाइगर रिजर्व में बसे हुए हैं उनका आरोप है कि वन विभाग के…
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मध्य प्रदेश : सरकारी उदासीनता से भूखे मरने पर मजबूर मछुआरे; मत्सय विभाग के आदेश…

भोपाल 2 जून 2020। कोविड-19 महामारी के कारण 24 मार्च की मध्य रात्रि से घोषित लाक डाउन के कारण मध्यप्रदेश के…

झारखण्ड : 23 बैठकों के बाद भी नहीं सुलझ सके डिमना बांध विस्थापितों के मुद्दे

सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए लिए गए डिमना डैम की ज़मीन को टाटा कंपनी अपनी निजी जमीन की तरह मानती है। शहर को पीने का पानी देने वाले स्रोत क्या टाटा कंपनी के हो सकते है? फिर आखिर क्यों टाटा कंपनी को लीज पर मिली ज़मीन को कंपनी अधिकारी अपना मान बैठे हैं? विस्थापितों को मूल सुविधाओं से वंचित क्यों किया जा रहा है? इन सवालों को लेकर डिमना डैम के विस्थापितों…
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आदिवासियों की बेदखली का फरमान और जमीन की कारपोरेटी लूट

-सीमा आज़ाद 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में 13 फरवरी को दिया गया एक ऐसा फैसला जंगल में आग की तरह फैला, जिसने लोगों को…

अंग्रेजों से भी बेरहम साबित हुई भारत की न्यायपालिका

कुछ लोग इस भ्रम में रहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट या हमारी न्याय व्यवस्था भगवान शंकर के त्रिशूल पर बसी काशी नगरी जैसी…

माई लॉर्ड : जंगल नहीं छोड़ेंगे आदिवासी, प्रतिरोध की तैयारी

-पूजा सिंह रायपुर/भोपाल. देश की सर्वोच्च अदालत के आदेश के बावजूद देश भर के जंगलों में सैकड़ों सालों से रहने वाले आदिवासी अपना घर नहीं छोड़ेंगे .बस्तर ,सरगुजा ,झाबुआ से लेकर उत्तर प्रदेश के आदिवासी अंचल से जो जानकारी आ रही है वह गंभीर है .वे सर्वोच्च अदालत के फैसले को आदिवासियों के खिलाफ अबतक का सबसे बड़ा हमला मान रहे हैं .बस्तर में पहले से ही…
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