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राज्यवार रिपोर्टें
उड़ीसा : ढिंकिया में जेएसडबल्यू के प्रोजेक्ट पर एनजीटी ने लगाई रोक, प्रदर्शनकारियों को राहत
ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में दिसंबर 2021 से विरोध-प्रदर्शन जारी था। तब प्रशासन ने पान की बेलों को गिराकर गांव की जमीन का अधिग्रहण शुरू किया था। राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी ने अपने आदेश में माना कि जेएसडब्ल्यू परियोजना में भारी निवेश हुआ है, लेकिन टिकाऊ विकास के सिद्धांत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ओडिशा उच्च न्यायालय ने भी परियोजना के लिए…
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हिमाचल प्रदेश : दिले राम शबाब न होते तो कुल्लू की तीर्थन घाटी को निगल जाते हाइड्रो…
यह पुराना आलेख है जिसे एक लेखक समूह (डॉ निरंजन देव शर्मा, कुलराजीव पन्त, सुरेश सेन निशांत,अजेय, मुरारी शर्मा, आत्मा…
मध्य प्रदेश : माधुरी बेन एक साल के लिए जिला बदर; एआईकेएमएस ने निष्कासन की निंदा
एआईकेएमएस की केंद्रीय कार्यकारी ने जागृत आदिवासी दलित संगठन की नेता माधुरी पर एक साल के निष्कासन आदेश पारित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की कड़ी निंदा की है। यह निष्कासन आदेश बुरहानपुर के वन और लकड़ी माफिया की ओर से विरोध कर रहे आदिवासियों पर हमले की अगली कड़ी है।
पिछले 8 महीनों में लगभग 15,000 एकड़ वन भूमि में पेड़ काटे गए हैं, हजारों…
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मणिपुर की हिंसा के मायने
उत्तर-पूर्व के सीमावर्ती राज्य मणिपुर में करीब दो महीनों से जारी तीखी हिंसा ने यह सहज सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या…
भूमि अधिकार आंदोलन का 30 जून 2023 को वन भूमि के अनियंत्रित दोहन और वन संरक्षण अधिनियम में लगातार बढ़ते संशोधनों के विरोध में राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध का आह्वान
भूमि अधिकार आंदोलन की तरफ से अभिवादन! हम आशा करते है कि यह पत्र आपको कुशल स्वास्थ्य और पूरे उत्साह में प्राप्त हो। हम आप सभी का एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दे की तरफ ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं और एक सामूहिक कार्यवाही की मांग करते हैं।
देश भर में वन भूमि का आशातीत दोहन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर क्षति पहुँचा रहा है और परम्परागत…
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कैंपेन फॉर सर्वाइवल एंड डिग्निटी का राष्ट्रव्यापी आह्वान : 5 जून और 9 अगस्त 2023…
कैंपेन फॉर सर्वाइवल एंड डिग्निटी (सीएसडी) का राष्ट्रीय सम्मेलन 14-15 मई 2023 को नई दिल्ली के रतन आर्य पब्लिक स्कूल,…
परमाणु ऊर्जा में विदेशी पैसा
डेढ़ दशक पहले अमरीका के साथ होने वाले जिस परमाणु समझौते को लेकर तब की मनमोहन सिंह सरकर गिरने-गिरने को हो गई थी, आज…
लघु वन उत्पादों से बेदखल होते आदिवासी
अपने तरह-तरह के जैविक, सामाजिक और प्राकृतिक उपयोगों के आलावा आजकल जंगल व्यापार-धंधे में भी भारी मुनाफा कूटने के काम आ रहे हैं। इसमें सेठों, सरकारों की बढ़-चढ़कर भागीदारी हो रही है। कैसे किया जाता है, यह कारनामा? और क्या होते हैं, इसके नतीजे? प्रस्तुत है, इसी विषय पर प्रकाश डालता राज कुमार सिन्हा का यह लेख;
देश के 625 जिलों में से 190 जिलों में…
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