संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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विस्थापन विरोधी आंदोलन

बैतूल के आदिवासियों ने शुरु किया सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा बचाओ अभियान

मध्य प्रदेश में बीते 21 सालों से वन विभाग द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की जा रही है। 12 दिसंबर 1996 भारत की सर्वोच्च अदालत ने सिविल याचिका क्रमांक 202/95 में वन और वन भूमि की व्याख्या एवं परिभाषा कर आदेश दिया था। इस आदेश के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय ने छोटे एवं बड़े झाड़ के जंगलों को वन भूमि के तौर पर परिभाषित किया था।…
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बारनवापारा अभ्यारण्य से आदिवासियों का जबरन विस्थापन शुरू : वेदांता कंपनी को दी…

छत्तीसगढ़ सरकार वनाधिकार मान्यता कानून की धज्जियां उड़ाते हुए बारनवापारा अभ्यारण्य से आदिवासियों को जबरन…

राजस्थान : जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ सामूहिक समाधि लेने उतारे किसान

जयपुर सीकर हाइवे स्थित नींदड गाँव में किसान पिछले 72 घंटों से भूमि समाधि ले कर बैठे हुए हैं। किसानों की…

छत्तीसगढ़ सरकार स्केनिया स्टील पर मेहरबान; छ साल से बिना पर्यावरण स्वीकृति के चल रहा था प्लांट

-रमेश अग्रवाल छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के पूंजीपथरा स्थित स्केनिया स्टील एंड पावर लिमिटेड की मुश्किलें बढती नजर आ रही हैं | सन 2008 में उद्योग ने बिना जनसुनवाई करवाये पर्यावरण मंत्रालय से विस्तार हेतु स्वीकृति तो ले ली | लेकिन जन चेतना ने इसके खिलाफ ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर दी | 2012 में ट्रिब्यूनल ने जन चेतना के पक्ष…
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नर्मदा घाटी के विस्तापितों की निर्णायक जंग में पुरा देश एकजूट

नर्मदा बचाओ आन्दोलन द्वारा आयोजित लोकमंच में आये राष्ट्रीय राजनीतिक दल के नेता सांसद, विधायक व सामाजिक संगठन के…

जल संसाधन मंत्रालय पर नर्मदा घाटी के लोगों का कफ़न सत्याग्रह; दिल्ली पुलिस ने किया लाठियों से सत्याग्रहियों का स्वागत

जल संसाधन मंत्रालय पर नर्मदा घाटी के लोगों का कफ़न सत्याग्रह शांतिपूर्वक धरने पर दिल्ली पुलिस ने किया लाठी चार्ज, महिलाओं के साथ की पुरुष पुलिस बल ने हाथापाई केंद्र और राज्य सरकार का नर्मदा घाटी के लाखों लोगो के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा नियोजित हमला सर्वोच्च अदालत, बिना पुनर्वास, जबरन विस्थापन पर लगाये रोक नई…
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असम : विस्थापन, फर्जी एनकाउंटर और जन आंदोलनों पर दमन

असम के काजीरंगा क्षेत्र में अभयारण्यो के विस्तार के नाम पर आदिवासी एवं अन्य समुदायों से उन्हकी जमीन छिनी जा रही है. जंगल पर और वन संसाधनों पर स्थानिको के नैसर्गिक अधिकारों को समाप्त किया जा रहा है. अपनी आजीविका और संस्कृती की रक्षा में वनों पर आश्रित आदिवासी समुदायों को उन्ही जंगलो से खदेड़ा जा रहा है, उन्हें जबरन विस्थापित किया गया जा रहा है. पिछले…
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