संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad

डॉ. सुनीलम और दयामनी बरला की रिहाई की मांग को लेकर जंतर मंतर पर साझा विरोध प्रदर्शन

जन आंदोलनों पर दमन बंद करो! डॉ. सुनीलम और दयामनी बरला को रिहा करो!! जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन 11 बजे, 26 नवंबर, 2012 से प्रिय साथी, सोमवार 26 नवंबर, 2012 को डॉ. सुनीलम और दयामनी बरला की रिहाई की मांग को लेकर आयोजित साझा विरोध प्रदर्शन में शामिल हों. डॉ सुनीलम और दयामानी बरला को जेल में रख कर भारत का शासक वर्ग कारपोरेट जगत का…
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यह साम्प्रदायिक नहीं, हिंदूवादियों की इकतरफा हिंसा थी

फैजाबाद में हुई हिंसा को लेकर पिछली 18 और 19 नवम्बर को छह सदस्यीय स्वतंत्र जांच दल ने पूरे मामले की छानबीन की। जांच दल में शामिल थे- वरिष्ठ पत्रकार सईद नकवी, इलाहाबाद विश्वविद्यालय की रंजना कक्कड़, यूपी पीयूसीएल के पूर्व महासचिव ओडी सिंह, स्त्री अधिकार संगठन की पद्मा सिंह, पीडीएसयू के आलोक कुमार और शम्स विकास। जांच दल ने फैजाबाद तथा आसपास के…
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नर्मदा: पुनर्वास में भ्रष्टाचार

नर्मदा नदी पर निर्माणाधीन सरदार सरोवर और इंदिरा सागर बांध मे विस्थापितों के पुनर्वास के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार…

आखरी सांस तक लड़ती रहूंगी : जेल से दयामनी बारला का इंटरव्यू

झारखंड में किसानों की जमीन के अधिग्रहण के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला…

दयामनी बारला: जेल से लिखे पत्र को सुनिये

आज रांची के (ए. के. राय ) सेशन कोर्ट में दयामनी बारला की जमानत अर्जी पर चोथी बार सुनवाई बेनतीजा रही. अगली सुनवाई 21 नवम्बर को होगी. 16 अक्टोबर से अबतक एकके बाद एक तीन फर्जी केसों में दयामनी जी को फंसाया गया है. साफ़ तौर पर यह उनको नगड़ी आंदोलन से अलग-थलग कर ज़मीन हथियाने की साजिश है. यह विडियो सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला के जेल से लिखी…
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कटनी: बर्बर दमन व छल के बीच जारी है प्रतिरोध

मध्य प्रदेश के कटनी जिले में भूमि अधिग्रहण के विरोध में धरना दे रहे किसानों पर बर्बर पुलिसिया दमन रूकने का नाम…

मुलताई गोलीकाण्ड :डा. सुनीलम और अन्यों को हुई उम्रकैद, फैसलों की समालोचना

डा. सुनीलम और अन्यों को जो सजा वर्ष 1998 के मुलताई पुलिस फाइरिंग केस में दी गई है, जिसमें 24 किसानों की पुलिस की…

झारखण्ड के 12 साल: क्या खोया, क्या पाया

आज 15 नवंबर 2012 को अलग झारखण्ड राज्य के गठन को 12 साल पूरे हो जायेंगे। इस मौक़े पर आज रांची के मोरबादी मैदान में सरकारी उत्सव मनाया जायेगा। इसमें अब तक हुए तथाकथित विकास का ढोल पिटेगा जो ज़ाहिर है कि झूठ और मक्कारी से मढ़ा हुआ होगा। इसकी थाप यह एलान करने की गरज़ से होगी कि होशियार-ख़बरदार, अभी और अंधेरा छायेगा, कि हक़ और इंसाफ़ की आवाज़ को…
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