बलात कब्जायी जमीनें, अपनाया साम-दाम-दण्ड-भेद का आजमाया तरीका! सरकार एवं कम्पनियों का विकास को तेज करने का नया अंदाज़ !!
छत्तीसगढ़ राज्य में 69000 एकड़ जमीन (जो कृषि भूमि है) को गैर कृषि कार्यों हेतु स्थानांतरित कर दिया गया। सड़क के किनारे की लगभग सारी की सारी जमीनों का मालिकाना अब किसानों का नहीं रह गया है। आज किसानों की भूमि हड़पने की तिकड़म अपने शबाब पर है। आज छत्तीसगढ़ में भूमि हड़पने की साजिशें सबसे बड़ी चुनौती है।
रायगढ़ जनपद की रायगढ़, तमनार एवं घरघोड़ा…
और पढ़े...
कार्यवाहियाँ पूर्व निर्धारित फिर भी जारी है जन सुनवाइयों की नौटंकी
पर्यावरण विभाग की जांच संदेह के घेरे में। कोल वाशरी की बोलती तस्वीरें।
मामला ‘‘जिंदल कोल वाशरी’’ जन सुनवाई का…
सम्पादकीय, दिसंबर 2010
भारत में पहला निजी बंदरगाह बनाने के लिए जिस प्रकार पोस्को कम्पनी को पारादीप में इजाजत दी गयी है उसी तरह से भारत…
पॉवर प्लांट से विस्थापित एक गांव की कहानी
मुआवजा मिल गया, खर्च भी हो गया अब क्या करें ?
टिहरी गढ़वाल जनपद के मुनेठ गांव की हकीकत विस्थापन की त्रासदी और विकास के दावों की असलियत बयाँ करती है। यह गांव कोटली भेल 1 अ परियोजना के अन्तर्गत विस्थापित किये गये गांवों में से एक है। इस परियोजना के तहत 195 मेगावाट बिजली उत्पादित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना के तहत 11 गांवों की 19589…
और पढ़े...
पूर्वी उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेस-वे के ख़िलाफ़ बढ़ता जनाक्रोश
केवल उत्तर प्रदेश में ही गंगा एक्सप्रेस-वे के पहले चरण के कारण घट जाएगा हजारों एकड़ कृषि योग्य उपजाऊ भूमि का रकबा…
नेशनल हिल्स पार्क : 37 गांवों के वाशिंदों को हटाकर जानवरों को बसाने का फरमान
राजस्थान के चित्तौड़गढ जिले के ब्लॉक भैसरोडगढ में राजस्थान सरकार ने तीन ग्राम पंचायतों के 37 गांवों के वाशिंदों…
जन सुनवाई का नाटक : जन विरोध को दबाने के लिए आँसू गैस, लाठी, गोली का इस्तेमाल
रायगढ़ के दर्रामुंडा के लोग नहीं चाहते थे कि कोई कंपनी उनके इलाक़े में डेरा डाले और उन्हें कहीं का न छोड़े लेकिन सरकार तो यही चाहती थी। इसलिए गुजरी 17 मई 2010 को एसकेएस स्टील एंड पावर लिमिटेड की परियोजना के लिए जन सुनवाई का आयोजन तय कर दिया गया।
अब लोकतांत्रिक और कल्याणकारी सरकार दाऊद इब्राहिम तो हो नहीं सकती। इसलिए जन सुनवाई का नाटक है।…
और पढ़े...
मित्तल को अब चाहिए बोकारो में जमीन विरोध में आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच ने…
झारखण्ड सरकार ने अगस्त 2005 में मित्तल कंपनी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किये थे। इस एमओयू के आधार पर कंपनी 12,000…
पर्यावरण, नदी, पहाड़ बचाने का संकल्प : विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को रैली एवं जनसभा…
जब पहाड़ टूटता है-तब सिर्फ मिट्टी, पत्थर-कंकड़, बालू, पेड़-पौधे ही नहीं गिरते हैं वरन नष्ट होता है वहां का समाज, उस…
पोस्को विरोधी धरने पर किये गये पुलिसिया हमले के खिलाफ 6 राजनीतिक दल पी.पी.एस.एस. के समर्थन में आये सामने तथा किया पोस्को कम्पनी का विरोध
पोस्को कम्पनी की स्थापना के लिए चुने गये तीन ग्राम पंचायतों- ढिंकिया, नुआगांव तथा गढ़कुजंग के प्रवेश द्वार बालिटुडा में जनवरी माह से चल रहे धरने; जिसने इन ग्राम पंचायतों में कम्पनी तथा सरकार के अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर रखा था; पी.पी.एस.एस. के इस आंदोलन को पूरे देश के विभिन्न जन संघर्षों से मिल रहे समर्थन तथा उड़ीसा में चल…
और पढ़े...