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झारखण्ड
झारखण्ड : भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के विरोध में मोदी व सीएम का पुतला फूंका
गुजरी 28 जनवरी को झारखण्ड के रांची में आदिवासी जन परिषद के कार्यकर्ताओं ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश व स्थानीयता नीति बनाये बिना झारखंड में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व सीएम रघुवर दास का पुतला फूंका। इससे पहले जयपाल सिंह स्टेडियम से रैली निकाली गयी।
जन परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष, प्रेमशाही मुंडा ने कहा कि…
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झारखण्ड : आदिवासियों का देशव्यापी उलगुलान का ऐलान !
झारखण्ड के खूंटी जिले में 8 जनवरी 2015 को आबा भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली पर भारी बारिश और तूफान के बीच भारी…
विस्थापन के विरुद्ध लड़ रहे जन संगठनों का दो दिवसीय सम्मेलन संपन्न
सम्मेलन की रिपोर्ट
कोल्हान प्रमंडल स्तरीय विस्थापन के खिलाफ में
आंदोलनकारी साथियों का सम्मेलन दिनांक…
दयामनी बारला को बहुमत, जल जंगल जमीन पर हुकूमत !
झारखण्ड के खूंटी लोकसभा सीट पर जैसे जैसे मतदान की तारिख नजदीक आ रही है, खूंटी में चुनावी सक्रियता बढ़ती जा रही है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में फर्क भी बढ़ता जा रहा है। जहां एक ओर शहरी क्षेत्रों में झारखण्ड पार्टी, भाजपा और कांग्रेस ने झंडे और पोस्टरों से पूरा बाज़ार पाट दिया है, वहीँ दूसरी और आदिवासी बहुल ग्रामीण क्षेत्रों में 'आप'…
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झारखंड में विरोध के बावजूद जिंदल के स्टील प्लांट को हरी झंडी, आंदोलनकारियों पर…
जिंदल के स्टील प्लांट पर मार्च 8, 2014 को असनबोनी, जिला-सिंहभूम (झारखण्ड) में सरकार ने पुलिसिया दमन के…
‘अनिवासी’ सारंडावासी !
झारखण्ड के सारंडा जंगल के बीच तकरीबन सौ गांव ऐसे हैं जिनके बारे में औपचारिक रूप
से राज्य या केंद्र सरकार…
फायरिंग रेंज के खिलाफ सुलगती आदिवासी जनचेतना: नेतरहाट में संघर्ष के इक्कीस साल
देश की सुरक्षा के लिए आदिवासी सिर्फ सेना में ही अपनी जानें नहीं देते, उनकी ज़मीनों भी राष्ट्र की सुरक्षा की भेंट चढ़ जाती हैं, जबकि इस राष्ट्र में न तो उनकी आवाज़ है और न ही पहचान। नेतरहाट के आदिवासी पिछले इक्कीस साल से राष्ट्रभक्ति के नाम पर अपनी जीविका का सौदा करने के खिलाफ संघर्षरत हैं और नक्सलवाद से निज़ात दिलाने के नाम पर एक बार फिर उनकी ज़मीन…
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अपनी ही ज़मीन पर काम को तरसते आदिवासी !
झारखंड़ के धनबाद में स्थानीय आदिवासी गुजरी 31 दिसम्बर 2013 से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं यह आदिवासी…
डिमना बांध : हम तो लड़ेंगे साथी, हम न डरेंगे !
गुजरी 30 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2013 तक झारखण्ड के जमशेदपुर शहर के पास डिमना बांध के विस्थापितों…
डिमना बांध : टाटा के विरोध में विस्थापितों का जल सत्याग्रह
टाटा कंपनी को कालीमाटी से कोरस तक पहुंचने में डिमना बांध के विस्थापितों का क्या योगदान है, किसी को भी पूछा जाय तो स्पष्ट रूप से जवाब आयेगा कि डिमना बांध विस्थापितों ने टाटा कंपनी के विकास के लिए अपने पूर्वजों के गांव को त्याग कर जमीन दिया। बांध से 12 मौजा जलमग्न हैं। विस्थापित परिवार दलमा के तराई पर बसने के लिए मजबूर हुए। आज भी देखा जा सकता है…
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