संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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राज्यवार रिपोर्टें

सौ साल बाद भी संघर्षों को दिशा दिखाता मुलशी सत्याग्रह

कम ही लोगों को मालूम होगा कि विस्थापन-पुनर्वास से लेकर विकास की अवधारण तक पर सवाल उठाने वाली बांध विरोध की ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की लडाई सौ साल पुराने ‘मुलशी सत्याग्रह’ की विरासत का ही एक पड़ाव है। उस जमाने में ‘टाटा कंपनी’ के बांध के खिलाफ चले इस लंबे संघर्ष को लेकर पत्रकार और आंदोलनकारी विनायकराव भुस्कुटे की मराठी में लिखी किताब ‘मुलशी सत्याग्रह’…
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उड़ीसा : वन मंजूरी के बिना हो रहा खनन ‘अवैध’ है- सुप्रीम कोर्ट

6 जून 2022 नयी दिल्ली; सुप्रीम कोर्ट ने इस बात से नाराजगी जताते हुए कहा कि खनन कंपनियां, जिन्हें केंद्र और अन्य…

राकेश टिकैत पर हमला : किसान संगठन अपने नेताओं की सुरक्षा का इंतजाम स्वयं करें

राकेश टिकैत पर स्याई फेंके जाने की घटना की न्यायिक जांच कराए कर्नाटक सरकार सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग -डॉ सुनीलम 30 मई 2022; किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत पर स्याही फेंके जाने की घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह निंदनीय गम्भीर घटना है, स्याही की जगह एसिड या बम भी हो सकता…
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पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों के राज्यपालों को गृह मंत्रालय का दिशा-निर्देश

दिल्ली 26 मई 2022। पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों (राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, उड़ीसा, गुजरात,…

गुजरात : पार-तापी-नर्मदा नदी लिंक परियोजना के नाम पर आदिवासियों को उजाड़ने की…

-विवेक शर्मा वैसे तो इस देश में हमेशा से आदिवासी समाज हाशिये पर रहा है, लेकिन इन दिनों गुजरात में यह समाज भाजपा…

छत्तीसगढ़ : हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे आदिवासियों पर केस दर्ज

छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने परसा कोयला खनन परियोजना के लिए हसदेव अरण्य क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और खनन गतिविधि को अंतिम मंज़ूरी दे दी है, जिसके ख़िलाफ़ आदिवासी और कार्यकर्ता ​‘चिपको आंदोलन’ जैसा प्रदर्शन कर रहे हैं. कार्यकर्ताओं का कहना है कि पेड़ों की कटाई और खनन से 700 से अधिक लोगों के विस्थापित होने की संभावना है. इससे आदिवासियों की…
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दिल्ली : लंबे संघर्ष के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायक को मिला ग्रेच्युटी का हक़

न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति अभय एस. ओका की पीठ ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र भी वैधानिक कर्तव्यों का पालन…

झारखण्ड : 200 किमी पैदल मार्च कर राजभवन पहुंचे नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के प्रभावित आदिवासी

रांची 25 अप्रेल 2022: गुमला-लातेहार टुटूवापानी से करीब 200 किलोमीटर का पैदल मार्च करके नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के प्रभावित ग्रामीण आज राजभवन पहुंचे. राजभवन पहुंचने के बाद राज भवन के निकट तरह प्रभावित ग्रामीण धरने पर बैठे और प्रदर्शन किया. बाद में एक ज्ञापन राज्यपाल को केंद्र के नाम से सौंपा गया जिसमें फिल्ड फायरिंग रेंज परियोजना की अधिसूचना रद…
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