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राज्यवार रिपोर्टें
छत्तीसगढ़ : समर्थन और विरोध के बीच परसा कोल खदान को मंजूरी
-क्रांती कुमार रावत
समर्थन और विरोध के बीच परसा कोल खदान को शासन की मंजूरी
खुली तो पर्यावरण सत्यानाश, अटकी तो जीवन की आश
उदयपुर 14 अप्रेल 2022 : परसा कोल खदान के समर्थन में दर्जनों AC गाड़ियों में भरकर लाये गए लोगों ने कलेक्टर साहब के समक्ष खदान खुलवाने जमकर नारे बाजी की। कुछ दिन बाद राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ के सीएम की मुलाकात हुई तत्पश्चात परसा…
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भाजपा हो या कांग्रेस सबकी पसंद अडानी : छत्तीसगढ़ कांग्रेस सरकार ने परसा कोयला…
छत्तीसगढ़ सरकार ने 6 अप्रैल 2022 को सूरजपुर और सरगुजा जिलों में पड़ने वाली परसा ओपनकास्ट कोयला खनन परियोजना के लिए…
नर्मदा जल के अंतहीन दोहन से बचेगी नर्मदा?
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रामनवमी के अवसर पर चित्रकूट में घोषणा किया कि नर्मदा से जोड़कर मंदाकिनी नदी को सदानीरा बनाएंगे। ज्ञात हो कि इसके पहले नर्मदा से पानी लाकर क्षिप्रा, कालिसिंध, मालवा-गंभीर और पार्वती लिंक परियोजनाओ से पुनर्जीवित करने का कार्य जारी है। जबकि नर्मदा चंबल, नर्मदा माही, नर्मदा मांडू और नर्मदा ताप्ती योजना प्रस्तावित है। इसमें…
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मध्य प्रदेश : पर्यावरण मंत्रालय द्वारा आंवलिया बांध परियोजनाकर्ता जल संसाधन विभाग…
पर्यावरण मंत्रालय द्वारा आंवलिया बांध परियोजनाकर्ता जल संसाधन विभाग के खिलाफ कार्यवाही का आदेश
बांध के निर्माण पर…
जलवायु परिवर्तन : खेती पर मंडराता खतरा
मौजूदा विकास के साथ जो संकट सर्वाधिक महसूस किया जा रहा है, वह है- जलवायु परिवर्तन का। जिस तौर-तरीके से हम अपना…
कोरबा की दीपका खदान विस्तार योजना की जनसुनवाई रद्द
कोरबा 23 मार्च 2022: एसईसीएल के मेगा प्रोजेक्ट में शामिल देश की तीसरी सबसे बड़ी दीपका कोयला खदान के विस्तार की प्रक्रिया जनता की ताकत के आगे एक बार फिर रुक गई है. 23 मार्च 2022 को दीपका खदान का विस्तार करने के लिए जन सुनवाई का आयोजन प्रस्तावित था. इसके ठीक एक दिन पहले मंगलवार को कोरबा कलेक्टर ने आदेश जारी कर इस जन सुनवाई पर रोक लगा दी है.
ज्ञात…
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झारखण्ड : नेतरहाट फायरिंग रेंज के विरोध में लातेहार में जुटान; 22-23 मार्च 2022
जोहार साथियों,
17 मार्च 2022 लातेहार। नेतरहाट फायरिंग रेंज के अंतर्गत 1471 किलोमीटर भौगोलिक क्षेत्र और 245 गांव…
गुजरात : तापी पार नर्मदा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासियों का प्रदर्शन
अगर ये तीन बड़े बांध बन गए तो 35 से ज्यादा गांवों के 1700 से ज्यादा परिवारों की जमीनें और घर जलमग्न हो जाएंगे.50 हजार से ज्यादा आदिवासी प्रभावित होंगे
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