संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad

महान के ग्रामीणों ने किया भूमि अधिग्रहण कानून का विरोध

30 मार्च 2015। सरकार द्वारा महान जंगल को कोयला खदान के लिये आंवटित नहीं करने के निर्णय को लोकतंत्र की जीत बताते हुए आज अमिलिया में महान संघर्ष समिति द्वारा लोकतंत्र महोत्सव का आयोजन किया गया। इस महोत्सव में महान वन क्षेत्र में स्थित करीब 20 गांवों के सैंकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। समारोह में ग्रामीणों ने सरकार द्वारा प्रस्तावित भूमि अघिग्रहण…
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जनसंघर्षों की रणनीति बैठक : भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ एवं भूमि अधिकार के लिए

भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ और भूमि अधिकार के लिए आन्दोलनों की रणनीति बैठक 10:30 से 3:30 बजे…

भूमि अधिग्रहण बिल 2015 : मोदी – मुख्यमंत्री के पुतलों पर तीरों की बौछार !

झारखण्ड के दुमका क्षेत्र के आदिवासियों ने भूमि अधिग्रहण बिल 2015 के विरोध में प्रधानमंत्री मोदी, प्रदेश के…

छत्तीसगढ़ : भूअर्जन अध्यादेश और कॉरपोरेट राज के खिलाफ रैली !

गुजरी 15 मार्च 2015 को छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन के बैनर तले जशपुर जिले के कांसाबेल ब्लोक पर भूअधिग्रहण अध्यादेश 2014 तथा खनन अध्यादेश के विरोध में विशाल रैली निकालकर जनसभा आयोजित की जिसमे लगभग 30 हजार किसान आदिवासी शामिल हुए. जनसभा को छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन की सुधा भरद्वाज, आलोक शुक्ला, अखिल भारतीय किसान महासभा के चित्तरंजन बक्शी, जशपुर जनपद…
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जिंदल, जंगल और जनाक्रोश : 10 सालों से पोटका के आदिवासियों का बहादुराना संघर्ष…

झारखण्ड के पोटका के आसोनबनी में एक स्टील संयंत्र स्थापित करने के लिए जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड व झारखण्ड…

भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल 2015 : भूमि संशोधनों में कितना है दम !

नौ संशोधन और दो उपनियमों के साथ भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल-2015 लोकसभा में मंजूर हो गया। प्रत्येक संशोधन व उपनियम…

नदी जोड़ परियोजना केे खतरे

मोदी सरकार ने नदी जोड़ परियोजना को नए सिरे से प्राणवायु देने का फैसला कर लिया है। इस परियोजना से होने वाले लाभ हानि की गणना करने में की गई चुक बहुत खतरनाक सिद्ध हो सकती है। नदी जोड़ परियोजना की विसंगतियों को उजागर करता सप्रेस से साभार डॉ.ओ.पी.जोशी का सामयिक आलेख; जनवरी 2015 में दिल्ली में आयोजित भारत जल सप्ताह में पर्यावरणविदों द्वारा जारी…
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जमीन की लड़ाई पहुंची दिल्ली : आर-पार का संघर्ष करने का मन बना चुके हैं देश के किसान

पुर्जा-पुर्जा कट मरे, कबहूं न छाड़े खेत! अभिषेक श्रीवास्‍तव करीब तीन हफ्ते पहले की बात है जब दिल्‍ली की चुनावी सरगर्मी के बीच एक स्‍टोरी के सिलसिले में हम कम्‍युनिस्‍ट पार्टियों के सुनसान दफ्तरों के चक्‍कर लगा रहे थे। मतदान से ठीक एक दिन पहले 36, कैनिंग लेन में जाना हुआ जहां मार्क्‍सवादी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी (माकपा) की किसान सभा का…
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