संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad

‘भूमि अधिग्रहण’ की समस्या पर ‘विचार-विमर्श’

साझी पहल का फैसला: संसद पर प्रदर्शन का निर्णय ! जन संघर्ष समन्वय समिति का गठन   ‘भूमि अधिग्रहण’ की समस्या पर विभिन्न जन संघर्षों के प्रतिनिधियों के साथ एक विचार-विमर्श का आयोजन 3 से 4 जून 2011 को  गढ़वाल भवन, नयी दिल्ली में आयोजित किया गया। इस विचार-विमर्श में छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, तथा हरियाणा में…
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महिला कामगारों के संघर्ष

जहां एक तरफ स्वयं सहायता समूह के जाल में फंसी तथा कर्ज से कराहती महिलायें आत्महत्या करने को विवश हो रही हैं वहीं उत्तर प्रदेश राज्य के कानपुर तथा राजस्थान राज्य के जयपुर शहरों में घरों में काम करने वाली महिलायें अपनी एकता एवं जागरूकता के बल पर अपने आपको एक बेहतर कल के लिए तैयार कर रही हैं। कानपुर शहर पिछले समय में अवसाद एवं निराशा से ग्रस्त…
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बाक्साईट खनन के खिलाफ उड़ीसा के सबसे ऊँचे पहाड़ की चोटी पर आदिवासियों का जमावड़ा

कोरापुट, 21 मार्च 2011 को लगभग 15000 आदिवासियों तथा परंपरागत वन निवासी समुदाय के लोगों ने देवमाली रेंज में बाक्साइट…

पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति 8 अप्रैल को घेरेगी विधान सभा

13 मार्च की रैली की घोषणा पोस्को कम्पनी के विरोध में चलने वाला संघर्ष धीरे-धीरे छठवां साल पूरा करने जा रहा है तथा तमाम जन संघर्षों का समर्थन भी प्राप्त करने में कामयाब रहा है। 13 मार्च को परियोजना के विरोधियों ने कम्पनी, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के विरोध में नारे लगाते हुए एक रैली निकाली और प्रस्तावित परियोजना स्थल का प्रवेश द्वार माने…
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वेदांत विश्वविद्यालय एवं वेदांता कंपनी पर कसता न्यायालयों का शिकंजा

केन्द्र के वेदांत एलुमिनियम कंपनी के लांजीगढ़ एल्युमिनियम रिफाइनरी के ताकत को 1 एमटीपीए से 6 एमटीपीए तक बढ़ाने की…

भूमि अधिग्रहण का विरोध, जारी है धरना-प्रदर्शन और गिरफ्तारी

हरियाणा राज्य के रोहतक जिले के 9 गांवों की 3368 एकड़ जमीन का अधिग्रहण खरखौदा में आई.एम.टी. बनाने के लिए किया जा रहा…

जे.पी. पॉवर प्लांट के लिए अधिग्रहीत कृषि भूमि के खिलाफ संघर्ष जारी है…….

लिखित वादे से मुकरा जिला प्रशासन धमकी पर आमादा घायल किसान शहीद अपनी जीविका, जमीन तथा कृषि बचाने के लिए संघर्षरत करछना (इलाहाबाद, उ.प्र.) के किसानों का धरना, क्रमिक अनशन अपने 250 दिन पूरा करने जा रहा है। लेकिन सरकार, प्रशासन तथा कंपनी किसानों की सुनने के बजाय उनको आतंकित करने पर आमादा है। इस बीच आंदोलन के नये घटनाक्रम के तौर पर जो…
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