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झारखण्ड
झारखंड के मुख्य न्यायधीश के नाम खुला पत्र
झारखंड की बहुसंख्यक जनता, आदिवासियों और मूलवासियों को न्याय मिले; उनके हितों में बने और उनकी जमीनों की रक्षा के लिए बने कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों की रक्षा हो। इस संधर्भ में विस्थापन विरोधी एकता मंच एवं कोल्हान प्रमंडल, जमशेदपूर, ने झारखंड के मुख्य न्यायधीश के नाम खुला पत्र लिखा है-
माननीय,
मुख्य न्यायधीश
झारखंड…
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नगड़ी के रैयतों को न्याय कौन देगा?
नगड़ी के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन पर ग्लैडसन डुंगडुंग कि एक रिपोर्ट :-झारखण्ड एक विशिष्ट राज्य…
आखिर नगड़ी के दर्द को कौन समझेगा ?
झारखण्ड की राजधानी रांची से सटे कांके थानान्तर्गत एक आदिवासी बहुल गांव है जिसका नाम नगड़ी। इस गांव की 227 एकड़ जमीन…
क्या न्यायपालिका आदिवासी विरोधी है?
15 जुलाई, 2012 को रिमझिम बारिस के बीच, सरकार के फरमान पर अपनी जमीन बचाने के लिए नगड़ी गांव के रैयत रांची के कांके स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में विराजमान हुए। यह विश्व विद्यालय भी उन्ही के बापदादो से जमीन छिनकर बनायी गयी है। सरकार अब उनका बचाखूचा जमीन भी विकास के नाम पर लूट कर उन्हें भूमिहीन, बेघर और लाचार बनाने पर तुली हुई है, जिसका…
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कांके-नगड़ी में भूमि अधिग्रहण के विरोध में स्थानीय आदिवासियों का संघर्ष
कांके-नगड़ी में सरकार जमीन अधिग्रहण कानून 1894 के तहत 1957-58 में राजेंन्द्र कृर्षि विश्वविद्यालय के विस्तार के लिए…
पूर्वी सिंहभूम, झारखण्ड से पोटका आंदोलनः एक इतिहास
भाग- 1झारखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सत्ता पर बैठते ही विकास के नाम पर यहां के प्राकृतिक…
भूमि अर्जन के प्रस्तावित विधेयक के खिलाफ लामबंदी
प्रस्तावित भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन विधेयक 2011 के खिलाफ 11 जन संगठनों ने 17 नवंबर 2011 को रांची में राजभवन का घेराव किया। सैकड़ों की संख्या में लोगों ने राजभवन के मुख्यद्वार को जाम किया और प्रस्तावित विधेयक का विरोध किया और कहा कि यह विधेयक पूंजीपतियों, उद्योगपतियों के हितों को ध्यान में रख कर बनाया गया है। इसमें आदिवासी, मूलवासी…
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सर्वे टीम को वापस किया आदिवासी महिलाओं की एकजुटता ने
पश्चिम सिंहभूम (झारखण्ड) जिले के नोआमण्डी ग्राम पंचायत क्षेत्र के गांव से सरकारी सर्वे टीम को गांव की आदिवासी…
झारखंड के सारंडा जंगल में आदिवासियों पर पुलिसिया जुल्म: एक सच्ची तस्वीर
10 अक्टूबर, 2011 को झारखंड मानव अधिकार आन्दोलन द्वारा तैयार सारंडा का शाब्दिक अर्थ सात सौ छोटी पहाड़ियों वाला…
सारांडा जंगल का सच: दमन, हत्या और गिरफ्तारी
पिछड़े झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारांडा जंगल से 6 घंटे से ज्यादा की यात्रा करते हुए 30 वर्षीय मंगरी होनहंगा अपने 4 महीने के पुत्र डुला होनहंगा तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ निराशापूर्ण हालत में रांची इंसाफ पाने की उम्मीद करके आयी। मॉं और बेटा दोनों ही बीमार थे...
डुला ग्रेड-3 का कुपोषित रोगी था और मंगरी एनीमिया से पीड़ित…
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