दो बार विस्थापित चिल्कादांड के संघर्ष की दास्तान
चिल्कादांड उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के शक्तिनगर थाणे में पड़ने वाले उन 5 गावों का एक सामूहिक नाम है, जिन्हें पहली बार 1960 में रिहंद डैम बनाने के लिए और फिर 1979 में एन टी पी सी के शक्तिनगर परियोजना के कारण विस्थापित होना पडा है. दो बार विस्थापन का दर्द झेल चुके लगभग 30 हज़ार की यह आबादी 1984 से ही एन सी एल कोयला खनन के विस्तार…
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नगड़ी के रैयतों को न्याय कौन देगा?
नगड़ी के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन पर ग्लैडसन डुंगडुंग कि एक रिपोर्ट :-झारखण्ड एक विशिष्ट राज्य…
राज्य-दमन के खिलाफ मानवाधिकार संगठनों का साझा संघर्ष
को-ऑर्डिनेशन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स ऑर्गेनाइजेशन (सीडीआरओ) के द्वारा7 सितम्बर 2012 को प्रातः 11 बजे, मंडी हाउस से…
करछना में किसानों की महापंचायत : जमीन नहीं देने का सकल्प दोहराया
इलाहाबाद के करछना तहसील के दस गाँवों के किसान 22 अगस्त को अपनी खेती की जमीन बचाने और पुलिल दमन के विरोध में सड़क पर उतरे. इन दस गांवो के किसानों की करीब 1800 एकड़ जमीन प्रदेश सरकार ने पॉवर प्लांट दे लिये तीन लाख रूपए प्रति बीघा के हिसाब से अधिग्रहित की थी. किसान शुरू से ही इसका विरोध कर रहे थे. मामला कोर्ट में पंहुचा. 13 अप्रैल 2012 को…
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परमाणु-ऊर्जा पर जन-सुनवाई: आमलोगों ने किया विनाश और दमन का विरोध
22 अगस्त को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित परमाणु ऊर्जा पर जन-सुनवाई में सरकार की परमाणु ऊर्जा नीति की आलोचना की…
कूडानकूलम संयंत्र के खिलाफ धरने का एक वर्ष पूरा
पीपुल्स मूवमेंट एगेंस्ट न्यूक्लियर एनर्जी के बैनर तले कूडानकूलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन…
चुटका परमाणु संघर्ष तेज, राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
मंडला जिले की हरी-भरी धरती के सुदूर इलाक़े में छोटा सा आदिवासी गांव है- चुटका। तीन साल पहले तक नारायनगंज तहसील में ही इसे बहुत कम लोग जानते थे। आज यह गांव मंडला में ही नहीं, पूरे मध्य प्रदेश में जाना जाता है। राज्य के बाहर भी यह नाम यहां-वहां लोगों की ज़ुबान पर चढ़ने लगा है। उसकी इस शोहरत के पीछे कोई चमत्कारिक उपलब्धि नहीं है। सामने खड़ी…
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आखिर नगड़ी के दर्द को कौन समझेगा ?
झारखण्ड की राजधानी रांची से सटे कांके थानान्तर्गत एक आदिवासी बहुल गांव है जिसका नाम नगड़ी। इस गांव की 227 एकड़ जमीन…
लूट-शोषण के खिलाफ बोलोगे तो मारे जाओगे !
हाल के महीनों में सरकारी दमन, कारपोरेट लूट और आर्थिक-सामाजिक विषमता के मुद्दों पर आवाज़ उठाने वाले लोगों पर…
परमाणु ऊर्जा पर जन-सुनवाई, 22 अगस्त, 2012,नई दिल्ली
भारत की सरकार बिलकुल अलोकतांत्रिक ढंग से परमाणु ऊर्जा का एक घातक विस्तार हम पर थोप रही है. इसके लिए लोगों के स्वास्थय तथा आजीविका पर इन परियोजनाओं के प्रभाव, भारत की वास्तविक ऊर्जा-जरूरतों, परमाणु ऊर्जा की सामाजिक तथा पर्यावरणीय कीमतों और फुकुशिमा के बाद दुनिया भर में परमाणु-ऊर्जा पर निर्भरता कम करने के चलन को भी अनदेखा किया जा रहा है.
हाल…
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