.
झारखण्ड
झारखण्ड के 12 साल: क्या खोया, क्या पाया
आज 15 नवंबर 2012 को अलग झारखण्ड राज्य के गठन को 12 साल पूरे हो जायेंगे। इस मौक़े पर आज रांची के मोरबादी मैदान में सरकारी उत्सव मनाया जायेगा। इसमें अब तक हुए तथाकथित विकास का ढोल पिटेगा जो ज़ाहिर है कि झूठ और मक्कारी से मढ़ा हुआ होगा। इसकी थाप यह एलान करने की गरज़ से होगी कि होशियार-ख़बरदार, अभी और अंधेरा छायेगा, कि हक़ और इंसाफ़ की आवाज़ को…
और पढ़े...
12 साल के सफर में टूटे सपने
सपनों की भूलभुलइया से निकल कर वास्तविकता के कड़वे धरातल पर उतर कर झारखण्ड राज्य अपनी उम्र के 13वें साल में पहुंच…
कुछ का विकास, बाकी का सत्यानाश
अलग राज्य के तौर पर झारखण्ड के पिछले 12 सालों पर नजर डालते हुए सवाल उठता है कि इसका फल किसकी झोली में गया और कौन…
बढ़ते दमन और दरिद्रता के 12 साल
ग्लैडसन डुंगडुंग
झारखण्ड राज्य अपनी स्थापना के 12 साल पूरा कर चुका है। यह राज्य 79,714 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहां 24 जिले, 152 टाउन एवं 32,616 गांव हैं और कुल जनसंख्या 3,29,66,238 है। प्राकृतिक संसाधनों से धनी इस राज्य की यात्रा 15 नवंबर 2000 को 2215 करोड़ रूपये के अतिरिक्त बजट से शुरू हुई थी लेकिन अपने 12 साल के सफर में यह…
और पढ़े...
दयामनी बारला की रिहाई के लिए दिल्ली में दस्तक: छात्र-युवाओं ने झारखंड भवन पर किया…
झारखंड ट्राइबल स्टुडेंट्स असोसिएशन (जे.टी.एस.ए.), ऑल इंडिया स्टुडेंट्स असोसिएशन (आइसा) तथा डेमोक्रेटिक स्टुडेंट्स…
झारखंडी जनांदोलन दशा और दिशा : एक साझा विमर्श
झारखंडी जनांदोलन दशा और दिशा : एक साझा विमर्श
25 नवंबर 2012
सुबह 11 बजे से सायं 4 बजे तक
एटीआई सभागार, रांची,…
अन्याय की बुनियाद पर न्याय मांगते झारखण्ड के आदिवासी
विस्थापन विरोधी एकता मंच और अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के बैनर तले पूर्वी सिंहभूम के पोटका से रांची तक, 2 नवम्बर को शुरू हुई पदयात्रा 10 नवम्बर 2012 को रांची में राजभवन के घेराव के लिय आयोजित प्रदर्शन में बदल गई. झारखण्ड के कोने-कोने से आये हजारों आदिवासियों ने ‘जल-जगल-जमीन की लूट, नहीं किसी को छूट’, हमें लोहा नहीं अनाज चाहिय, कारखाना नहीं, खेती…
और पढ़े...
दयामनी बारला का अंतहीन संघर्ष: सरकार गरीबों से डरती है, कोर्ट को आगे करती है
आज रांची के सेशन कोर्ट में आदिवासी नेता दयामनी बारला के मामले पर चली सुनवाई में फैसला टाल दिया गया है और केस की…
झारखण्ड: जनद्रोही क़ानूनों और राज्य दमन के ख़िलाफ़ आंदोलन तेज होगा
गुजरी 16 अक्टूबर से एक के बाद एक फर्जी केस लगाकर दयामनी बारला को झारखंड पुलिस न केवल जेल में रखे हुए है बल्कि…
जेल से दयामनी बारला की चिठ्ठी
आप सबों को जोहार,
मैंने झारखंड की धरती को कभी धोखा नहीं दिया. झारखंड की जनता के सवालों से कभी समझौता नहीं किया. कोयल नदी, कारो नदी और छाता नदी का बहता पानी इसका साक्षी है. इस धरती के मिट्टी-बालू में अंगुलियों से लिखना सीखा. कारो नदी के तट में बकरी चराते-नदी के पानी में डुबकी लगा कर नहाते तैरना सीखा. आकाश के ओस के बूंदों से नहाये घास-फूस और…
और पढ़े...