परमाणु ऊर्जा पर जनता का अधिकार-पत्र
परमाणु ऊर्जा पर जनता का यह अधिकार-पत्र हमारे जन-आन्दोलनों के साझा अनुभवों, संघर्षों तथा परमाणु-मुक्त भविष्य के प्रति हमारी दृष्टि का दस्तावेज है.
परमाणु ऊर्जा पर जनता का अधिकार-पत्र
प्रिय साथियों,
परमाणु ऊर्जा पर जनता के इस अधिकार-पत्र को अहमदाबाद में 25-26 जुलाई को होने वाले सम्मलेन में अंतिम रूप दिया जाएगा. परमाणु ऊर्जा के खिलाफ,युरेनियम…
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बादाम मजदूरों के जुझारू संघर्ष की शानदार जीत
25 जून, दिल्ली। करावल नगर क्षेत्र में करावल नगर मजदूर यूनियन के नेतृत्व में चल रही बादाम प्रसंस्करण उद्योग के…
मारुति सुजुकी दमन और प्रतिरोध का एक साल : 18 जुलाई को चलो मानेसर
गुजरी 24 जून को मारुती सुजुकी वर्कर्स युनियन की गुडगांव के हुडा सेक्टर 5 के ग्राउंड में वर्कर्स की आमसभा
हुई…
हम मरब, कउ नहीं बचाई बाबू: जीतलाल वैगा
यह केवल जीतलाल वैगा की कहानी नहीं हैं, बल्कि सिंगरौली से करीब 30 किलोमीटर दूर रिलायंस के पावर प्लांट के बनने के बाद अमजौरी में विस्थापन के बाद बनी बस्ती में सबकी यहीं कहानी है. ये उन लाखों-करोड़ो आदिवासी में शामिल हैं, जिन्हें भारत सरकार विकास के मुख्यधारा में लाने के बहाने विस्थापित कर रही है। विस्थापन सिर्फ जमीन-जंगल से ही नहीं…
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मारुति में मजदूरों पर दमन: अंधेर नगरी और चमगादड़ों का तिमिर-राग
अंधेरे का तिलिस्म जिन चमगादड़ों ने खड़ा किया है, वे इस मामले में मारुति प्रबंधन की शक्ल में हैं, सरकारी पक्ष के…
कोकाकोला संयंत्र: राष्ट्रीय हित में कारपोरेटी लूट को न्यौता
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से 32 कि.मी. दूर छारबा गांव में कोकाकोला संयंत्र लगाने की अनुमति देकर राज्य सरकार…
चुटका के बहाने शहरों से एक संवाद
नदियों के जलग्रहण क्षेत्र में परमाणु विद्युत संयंत्र लगाने के विनाशकारी प्रभाव सामने आ सकते हैं। नर्मदा नदी पर मध्यप्रदेश के करीब एक तिहाई यानि 2.5 करोड़ लोग आश्रित हैं। यदि इसमें किसी भी प्रकार का परमाणु प्रदूषण हुआ तो अकल्पनीय विध्वंस होगा। हमें इस विषय पर पूरी ईमानदारी से विचार करना चाहिए। चुटका परमाणु संयंत्र के मुद्दे पर सचिन कुमार जैन का…
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इंसाफ़-पसन्द नागरिकों के नाम दिल्ली मेट्रो रेल मज़दूरों की अपील
अन्धकार का युग बीतेगा ! जो लडेगा वो जीतेगा !!
साथियो,
आप सभी जानते और मानते हैं कि दिल्ली मेट्रो…
यह कैसी तरक्की है शोषण की ये चक्की है : दिल्ली मेट्रो रेल कामगार यूनियन
मेट्रो ठेका कर्मचारियों ने डी.एम.आर.सी. प्रशासन का पुतला फूंका!
गुजरी 30 मई को दिल्ली मेट्रो रेल…
संवेदनहीनता से उपजी संवादहीनता सरकार के लिए घातक – डॉ सुनीलम
माधुरी बहिन गत 17 मई से ही खरगौन जेल में हैं। उन्होंने जेल जाते समय कहा
कि वे गुलाम भारत में स्वतंत्र नागरिक हैं, ऐसा कोई कार्य जिन्होंने नहीं
किया, इसको लेकर वे जमानत दें। माधुरी जी का आचरण राष्ट्रीय आंदोलन की याद
दिलाता है जब स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आजादी के लिये सत्याग्रह करते थे
तथा गिरफ्तार किये जाने पर जमानत लेने से इन्कार कर देते…
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